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खुड़िया जलाशय की नहरें बन रही हैं कूड़ाघर, सिंचाई और पर्यावरण पर बढ़ा खतरा…


लोरमी। मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड स्थित खुड़िया जलाशय क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख जल स्रोत है। इसी जलाशय से निकलने वाली नहरों के माध्यम से कई गांवों की कृषि भूमि तक पानी पहुंचता है। लेकिन इन दिनों नहरों में लगातार कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक सहित अन्य अपशिष्ट फेंके जाने से जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं, जिससे खेती, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है।


नहरों में पहुंच रहा घरेलू कचरा
स्थानीय लोगों के अनुसार नहर किनारे कई स्थानों पर घरेलू कचरा, प्लास्टिक, पॉलीथिन, सड़ी-गली सामग्री और अन्य ठोस अपशिष्ट खुलेआम फेंके जा रहे हैं। बारिश या पानी के बहाव के साथ यह कचरा नहर में पहुंचकर जल को दूषित कर रहा है। यही प्रदूषित पानी खेतों तक पहुंचने से मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।


खेती और पर्यावरण पर पड़ सकता है गंभीर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। प्रदूषित पानी से सिंचाई होने पर मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है। प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट लंबे समय तक मिट्टी में बने रहते हैं, जिससे भूमि की प्राकृतिक संरचना खराब होती है और फसलों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा नहरों में कचरा जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित होता है, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। गंदे पानी में मच्छरों और हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि भी होती है, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है।


प्रकृति को होने वाले नुकसान
जल प्रदूषण बढ़ने से जलीय जीवों और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्लास्टिक और ठोस कचरा मिट्टी की उर्वरता को धीरे-धीरे कम करता है।
नहरों का जल प्रवाह बाधित होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है।
दूषित पानी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
गंदगी से दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
जल स्रोतों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से पर्यावरण पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित सफाई अभियान चलाया जाए, प्रमुख स्थानों पर कूड़ेदान और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा लोगों को जल स्रोतों की स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए।


नागरिकों ने आमजन से भी अपील की है कि वे नहरों और जल स्रोतों में किसी भी प्रकार का कचरा न डालें तथा स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।


“जल है तो कल है। खुड़िया जलाशय और उसकी नहरें स्वच्छ रहेंगी, तभी किसानों की फसल, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।”

RAHUL YADAV

Editor in chief

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