
मानवता की मिसाल बना पुना फाउंडेशन का सहयोग
लोरमी। वनग्राम तिलई डबरा की 60 वर्षीय श्रीमती पार्वती बैगा, बैगा जनजाति से संबंध रखने वाली वृद्ध महिला, इस समय अत्यंत कठिन हालात में जीवन यापन कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में परिवार पर लगातार दुखद घटनाएँ घटीं, जिसके कारण आज परिवार में कोई भी कमाने वाला सदस्य नहीं बचा है।
परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय है—
पति शिवरतन बैगा की तालाब में डूबने से मृत्यु
बेटी चैती बैगा का निधन
बेटा बबलू बैगा (उम्र 40 वर्ष) मानसिक विक्षिप्तता के कारण मृत
नातिन दुर्गेश्वरी बैगा विवाहित, पर मानसिक रूप से अस्वस्थ
फुलेश्वरी बैगा विवाहित, एक पुत्र की माँ
दिलेश्वरी बैगा मात्र 15 वर्ष की
वर्तमान में परिवार के पास न कमाने वाला सदस्य है और न ही बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का साधन। भोजन, इलाज, शिक्षा और दैनिक जीवन की समस्याएँ परिवार को घेर रही थीं।
ऐसी कठिन परिस्थिति में मानवता की मिसाल पेश करते हुए स्थानीय लोगों के सहयोग और दानदाताओं की मदद से पुना फाउंडेशन (एक कदम शिक्षा व स्वास्थ्य की ओर) आगे आया। जनसहयोग के माध्यम से फाउंडेशन द्वारा परिवार को बड़ी राहत प्रदान की गई, जिसमें शामिल है—
पाँच बेडशीट, चादर, कंबल, साड़ी, पेटीकोट, तकिया
एक टीन तेल, 50 किलो चावल, 5 किलो दाल, आटा
आलू, प्याज, लहसुन, सोयाबीन बड़ी, चना, मटर
परिवार के दैनिक खर्च और इलाज के लिए आर्थिक सहायता
इस सहयोग ने पार्वती बैगा और उनके परिवार को बड़ी राहत पहुंचाई। फाउंडेशन और ग्रामीणों ने वनग्राम तिलई डबरा के बैगा परिवारों को शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया।
पुना फाउंडेशन ने सभी दानदाताओं एवं सहयोगियों का धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि “जनसहयोग ही ऐसी जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल बन सकता है।”
यह पहल मानवता और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण है।




