अचानकमार टाइगर रिजर्व में आग से सुरक्षा व वन्यप्राणियों के पेयजल प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न…

अचानकमार टाइगर रिजर्व में ग्रीष्मकाल के दौरान जंगलों में आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण और वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में वन विभाग के विशेषज्ञों ने आग रोकथाम की आधुनिक तकनीकों से लेकर पेयजल आपूर्ति प्रबंधन तक विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
वन अग्नि रोकथाम पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण
कार्यशाला में पिछले पाँच वर्षों में हुई आग की घटनाओं का मैप आधारित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। साथ ही—
आग लगने के प्रमुख कारण
काउंटर फायर की तकनीक
अग्नि रेखा (फायर लाइन) की कटाई, सफाई एवं जलाई
आग लगने पर तत्काल सूचना तंत्र
मैदानी कर्मचारियों द्वारा त्वरित नियंत्रण की रणनीति
पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
वन रक्षकों को फायर ब्लोवर के उपयोग का प्रायोगिक अभ्यास भी कराया गया।
वन्यप्राणियों के पेयजल प्रबंधन पर विशेष फोकस
ग्रीष्म ऋतु में जलस्रोतों की कमी को ध्यान में रखते हुए—
प्राकृतिक एवं कृत्रिम जलस्रोत
सासरपीट के माध्यम से नियमित जल आपूर्ति
जलस्रोतों की समय-समय पर सफाई
पीक सीजन सर्वे
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया गया। सासर प्रभारियों को प्रतिदिन निगरानी एवं जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से वन प्रबंधन को मजबूती
कार्यशाला के दौरान श्री मंसूर खान, सदस्य—प्रोजेक्ट एलिफेंट स्टीयरिंग कमेटी, ने वन्यप्राणियों की सुरक्षा, अग्नि नियंत्रण और जल प्रबंधन पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
वहीं भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की प्रतिनिधि सुश्री सुमन्द्रिता बनर्जी ने अखिल भारतीय बाघ आंकलन फेज-IV के अंतर्गत ट्रैप कैमरा इंस्टॉल करने की तकनीक और डेटा संकलन प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
वन विभाग की टीम हुई शामिल
कार्यशाला में—
श्री संजय लूथर, सहायक संचालक (कोर)
श्री समीर जोनाथन, सहायक संचालक (बफर)
समस्त वन परिक्षेत्र अधिकारी
परिक्षेत्र सहायक
परिसर रक्षक
उपस्थित रहे।
ग्रीष्मकाल में सुरक्षा व्यवस्था होगी और सुदृढ़
इस कार्यशाला से अचानकमार टाइगर रिजर्व में आगामी गर्मी के मौसम में आग की घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण के साथ ही वन्यप्राणियों हेतु पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी। वन विभाग द्वारा किए जा रहे ये प्रयास जंगल और वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती प्रदान करते हैं।





