आजादी के प्रतीक बने उपेक्षा के शिकार! सरदार पटेल वार्ड में अतिक्रमण का अड्डा, युवा ने सौंपा ज्ञापन—गणतंत्र दिवस से पहले कार्रवाई की मांग

मुंगेली छत्तीसगढ़
नगर पालिका परिषद मुंगेली के सरदार पटेल वार्ड क्रमांक–02 में स्थित आजादी के प्रतीक रजत जयंती स्तंभ और स्वर्ण जयंती स्तंभ इन दिनों अपनी ही पहचान खोते नज़र आ रहे हैं। जिन स्मारकों को स्वतंत्रता की याद में सम्मान का स्थान दिया गया था, वे आज अतिक्रमण, गंदगी और लापरवाही की मार झेल रहे हैं।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता मैदान में — CMओ को सौंपा ज्ञापन
वार्ड निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता संदीप सिंह ठाकुर ने इस गंभीर मामले को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि नगर पालिका तत्काल स्थल निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाए और स्मारकों को ठीक-ठाक स्वरूप में लाए।

होटल–ठेले–गुमटी और पार्किंग ने घेरा स्मारक
स्मारकों के चारों ओर होटल, ठेले, गुमटियों की भरमार और अवैध वाहन पार्किंग ने पूरे क्षेत्र को ‘कचरे का चक्रव्यूह’ बना दिया है। जूता–चप्पल की दुकानें और अनियंत्रित भीड़ इन राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कम, उपेक्षा अधिक दिखा रही हैं।
संविधान का हवाला देकर प्रशासन को आईना
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 49 और 51A (एफ) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय धरोहरों का संरक्षण नागरिक और शासन दोनों का दायित्व है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने अब तक सिर्फ “कागज़ी देखरेख” की है, ज़मीन पर कुछ नहीं।
26 जनवरी से पहले कार्रवाई जरूरी — अन्यथा अनशन की चेतावनी
गणतंत्र दिवस करीब है और संदीप सिंह ठाकुर ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है—
“यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गांधीवादी तरीके से अनशन पर बैठना पड़ेगा, और इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका की होगी।”
CM, पर्यटन मंत्री और कलेक्टर को भी भेजी गई प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, और कलेक्टर मुंगेली को भी भेजी गई है।
अब निगाहें प्रशासन पर…
अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है।
क्या आजादी के इन प्रतीकों को उनका सम्मान वापस मिलेगा?
या वे इसी तरह अतिक्रमण और उपेक्षा के बीच मिटते रहेंगे?



