संत भगवंत दर्शन मेला : हनुमानगढ़ी आश्रम कुरुवार में पूज्य स्वामी जी का मंगलमय पदार्पण, भव्य स्वागत के साथ संपन्न हुआ एक दिवसीय मेले का आयोजन

कुरुवार (मुंगेली)।
वनांचल क्षेत्र बेलगहना–टेंगनमाड़ा के समीप स्थित हनुमानगढ़ी आश्रम ग्राम कुरुवार में फाल्गुन मास अष्टमी के शुभ अवसर पर आयोजित एक दिवसीय संत भगवंत दर्शन मेला अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
लगातार 24 वर्षों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा इस बार भी पूरी भव्यता के साथ आयोजित की गई।
पूज्य स्वामी जी का मंगलमय आगमन, हुआ अद्वितीय स्वागत
मेले के मुख्य आकर्षण रहे पूज्य स्वामी जी, जिनके मंगलमय पदार्पण पर श्रद्धालुओं और समिति द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
यह आश्रम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालु बताते हैं कि यहाँ पहुंचते ही मन को अद्भुत शांति मिलती है, इसलिए यह स्थान पूरे क्षेत्र में आस्था का केंद्र बन चुका है।
अयोध्या धाम की भांति पहाड़ पर विराजित संकट मोचन हनुमान
जिस प्रकार अयोध्या धाम में पहाड़ के ऊपर स्थित पवित्र हनुमानगढ़ी प्रसिद्ध है, ठीक उसी प्रकार कुरुवार स्थित इस आश्रम में भी पहाड़ की चोटी पर संकट मोचन हनुमान जी विराजित हैं। इसी कारण इसे स्थानीय रूप से हनुमानगढ़ी आश्रम कहा जाता है।
यह आश्रम श्री सिद्ध बाबा आश्रम बेलगहना से भी संबंधित है और पूज्य स्वामी जी के सानिध्य में प्रतिवर्ष भव्य आयोजन होते हैं।
पूज्य स्वामी जी का संदेश : “संकट मोचन के दर्शन सब कार्य सिद्ध करते हैं”
अपने आशीर्वचन में पूज्य स्वामी जी ने कहा—
“यहाँ की महिमा अपार है। जो भी श्रद्धा व भक्ति भाव से संकट मोचन हनुमान जी का दर्शन करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या और साहस के अद्वितीय प्रतीक हैं। वे कलयुग में जाग्रत देव के रूप में भक्तों से दुःख हरते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।”
रामचरित संगीत प्रस्तुति ने मन मोह लिया
मेले के दौरान समिति द्वारा रामचरित संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दूर–दूर से आए संगीत साधकों ने अपनी प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भंडारे में मिले प्रसाद का आनंद
कार्यक्रम संपन्न होने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने भंडारे में जाकर प्रसाद ग्रहण किया। विशाल संख्या में आए भक्तों ने इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल और यादगार बना दिया।
इन क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु
मुंगेली, लोरमी, कोरबा, बिलासपुर, कोंचरा, पुडू सहित आसपास के अनेक गांवों और कस्बों से भारी संख्या में श्रद्धालु भक्त अपनी आस्था लेकर पहुंचे।





