श्रीराम कथा विश्रामदायिनी: हिमान्शु महाराज ने कहा—श्रीरामचरित मानस मानव जीवन को आनंद और कल्याण का मार्ग दिखाती है

लोरमी। हाईस्कूल कोतरी में आयोजित चौदहवें श्रीरामचरित मानस सम्मेलन के पाँचवें दिवस की कथा में राज्यपाल सम्मान से सम्मानित शिक्षाविद, साहित्यकार एवं कथावाचक डॉ. सत्यनारायण तिवारी ‘हिमान्शु महाराज’ ने भक्तों को अमृतमय उपदेश दिए।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा आनंददायिनी, सुखप्रदायिनी और समस्त जीवों के लिए विश्रामदायिनी है। भगवान शिव ने माता पार्वती को जो कथामृत सुनाया, वही श्रीरामचरित मानस संपूर्ण मानवजाति के आत्मकल्याण, जनकल्याण और विश्वकल्याण का दिव्य मार्ग है।
हिमान्शु महाराज ने कहा कि जीव, ईश्वर का अंश होने के नाते स्वाभाविक रूप से सुख और आनंद चाहता है, और यह दोनों ही भगवान श्रीराम तथा उनकी दिव्य कथा से प्राप्त होते हैं।
कथा में दिए गए उपदेश, संदेश और आदेश का पालन कर मनुष्य अपने जीवन को धन्य कर सकता है।
वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन
डॉ. हिमान्शु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग पर विस्तृत, भावपूर्ण और ज्ञानप्रद व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
महामंडलेश्वर, साध्वी व संतों का भी आशीर्वचन
सम्मेलन में हनुमतद्वाराचार्य एवं हनुमतपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी महावीर दास जी (झांसी),
साध्वी लीला भारती (दतिया),
राघवदास (ओरछा) तथा
प्रफुल्ल पाण्डेय (प्रतापगढ़)
ने भी अपने आशीर्वचन देते हुए श्रीराम कथा के महत्व पर प्रकाश डाला।
संचालन एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन पंडित शिवकुमार पाण्डेय द्वारा किया गया।
समारोह में विद्यानंद चंद्राकर, लीलाधर सोनकर, लोकनाथ शर्मा, रमाकांत कश्यप, महेंद्र द्विवेदी, शारदा साहू, तोषन साहू, दरबारी यादव, ईश्वरी कश्यप, पंडित राजेंद्र शर्मा, पंडित मणिकांत पाठक सहित सैकड़ों श्रृद्धालु उपस्थित रहे।



