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संपत्ति की लालच में रचा गया खौफनाक खेल: “त्रिनयन एप” से खुली सेवानिवृत्त लेखापाल की हत्या की गुत्थी…

क्राइम स्टोरी मुंगेली-
पुलिस ने 11 आरोपियों व 4 नाबालिग को किया गिरफ्तार
लोरमी (मुंगेली) – सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर सिंह राजपूत के लापता होने की खबर मिलने के बाद जो मामला साधारण गुमशुदगी लगता था, वह धीरे–धीरे एक ऐसे खौफनाक षडयंत्र में बदल गया जिसे सुनकर पूरा जिला सकते में है।
संपत्ति हड़पने की नीयत, बाप–बेटे की दुश्मनी का फायदा, सुपारी किलर, फर्जी वचनपत्र, कार में हत्या और जंगल में गाड़ा गया शव— यह पूरा मामला किसी क्राइम वेब सीरीज़ से कम नहीं।
इस सनसनीखेज केस का पर्दाफाश पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री रामगोपाल गर्ग (भा.पु.से.), एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल (भा.पु.से.) के निर्देशन में मुंगेली पुलिस ने किया।




- गुम इंसान की रिपोर्ट… और शुरू हुआ सुरागों का पीछा
21 मार्च की शाम सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर सिंह की मोटरसाइकिल ग्राम मनोहरपुर के सुनसान राइस मिल मार्ग के पास मिली।
परिजन चिंतित थे—पर वे नहीं जानते थे कि दामोदर सिंह इस दुनिया में अब नहीं रहे।
थाना लालपुर में गुम इंसान क्रमांक 11/26 दर्ज हुआ।
आईजी और एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, डीएसपी हरविंदर सिंह,
साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक प्रसाद सिन्हा,
तथा लालपुर–लोरमी–जरहागांव पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर जांच शुरू करवाई। - “त्रिनयन एप” ने पकड़ा कातिलों का पीछा करती हुई कार
मृतक के घर से निकले बिंदु से लेकर मोटरसाइकिल मिलने की जगह तक सभी कैमरे खंगाले गए।
तभी त्रिनयन एप के जरिए एक स्लेटी रंग की ईओन कार लगातार दामोदर के पीछे-पीछे चलती दिखी।
हाईटेक कैमरों से नंबर सामने आया—
CG 10 AC 8986
वाहन मालिक—देवचरण साहू
उसने बताया—कार तो उसने संजय यादव को एक दिन के लिए किराए पर दी थी।
यही बयान इस पूरे मामले का पहला निर्णायक मोड़ बना। - संजय यादव टूटा—और सामने आया मौत का पूरा ब्लूप्रिंट
कड़ाई से पूछताछ में संजय यादव ने सब कबूल लिया।
उसने बताया—
मृतक के छोटे भाई रणजीत सिंह राजपूत,
साले पालेश्वर सिंह,
और चचेरे भाई रामपाल ने
10 लाख रुपये और 50 डिसमिल जमीन के बदले हत्या की सुपारी दी थी।
सुपारी किलर टीम:
संजय यादव, प्रिंस उर्फ श्रवण, योगेश गंधर्व, एक अन्य युवक
तथा 4 नाबालिग। - दुर्गा पूजा का झांसा… और मनोहरपुर के सुनसान मार्ग पर हत्या
रणजीत ने योजना अनुसार दामोदर को झाफल आने बुलाया।
संजय और उसकी टीम पूरे दिन दामोदर का पीछा करते रहे।
फिर मनोहरपुर के सुनसान मोड़ पर कार रोककर गमछा डालकर दामोदर की हत्या कर दी गई।
शव को ईओन कार में डालकर
नवरंगपुर–डिंडौरी के रास्ते ले जाया गया।
रास्ते में कार खराब हुई तो वाहन मालिक देवराज साहू से टाटा स्पेशियो गोल्ड मंगवाकर शव को बदला गया।
अंततः शव को कवर्धा जिले के देवसरा जंगल में नदी किनारे खोदकर रेत में गाड़ दिया गया। - फोन प्रयागराज में बहाया—ताकि लगे कि दामोदर साधु बन गया!
पुलिस की जांच में मृतक का फोन अंतिम बार प्रयागराज में सक्रिय मिला।
संजय ने बताया कि
रणजीत ने कहा था—
“अगर फोन प्रयागराज से बंद मिलेगा तो सबको लगेगा दामोदर वहीं कहीं साधु–सन्यासी बन गया।”
इसलिए घटना के बाद प्रिंस, योगेश और तीन नाबालिगों को मृतक का फोन लेकर प्रयागराज भेजा गया,
जहाँ उन्होंने फोन को गंगा नदी में फेंक दिया। - असली कहानी—संपत्ति की लालच और फर्जी वचनपत्र
जांच में सामने आया कि मृतक की
4 करोड़ की जमीन और 30 तोला सोना
उसके भाई–भतीजों की नजर में थे।
वे जानते थे—
बाप–बेटे के रिश्ते बेहद खराब हैं,
इसलिए योजना बनाई गई कि
सारा विवाद बेटे पर थोपकर जमीनें अपने नाम करवाली जाएं।
24 मार्च को मृतक के भाई नोटरी का कागज लेकर थाना पहुंचे।
इस कथित वचनपत्र में लिखा था कि
दामोदर अपने बेटे से कोई संबंध नहीं रखना चाहता
अपनी सारी संपत्ति भाई–भतीजों को बेचना चाहता है
और उन्हें पैसे दे चुका है
लेकिन कागज में गवाहों के हस्ताक्षर तक नहीं थे,
जो इसे फर्जी साबित करने के लिए काफी था। - शव बरामद—और गुत्थी सुलझ गई
संजय यादव की निशानदेही पर पुलिस टीम ने
देवसरा जंगल से मिट्टी में दबा शव बरामद किया।
परिजनों ने कपड़े और सामान देखकर शव की पहचान दामोदर राजपूत के रूप में की।
इसके बाद इस अंधे कत्ल की कहानी पूरी तरह उजागर हो गई। - गिरफ्तार आरोपी
कुल 11 आरोपी + 4 नाबालिग
रणजीत सिंह राजपूत, पालेश्वर राजपूत, रामपाल सिंह, पराग सिंह,
हेमंत राजपूत, अजय राजपूत, संजय यादव, श्रवण उर्फ प्रिंस,
योगेश गंधर्व, देवराज साहू, आशीष कारीकांत
4 विधि से संघर्षरत बालक।
सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। - जप्त सामान
सुपारी की रकम – ₹96,000
Hyundai Eon कार
Tata Spacio Gold कार
मोटरसाइकिल
स्कूटी - पुलिस टीम की उल्लेखनीय भूमिका
साइबर सेल, लालपुर, लोरमी और जरहागांव पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में
निरीक्षक प्रसाद सिन्हा, थाना प्रभारियों और पूरे स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।





