
रायपुर/मुंगेली, 18 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों व अधिकारियों की लंबित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन द्वारा आज जिला एवं विकासखंड स्तर पर चतुर्थ चरण आंदोलन के अंतर्गत भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया जा रहा है। यह फेडरेशन प्रदेश के 132 मान्यता एवं गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों का प्रतिनिधि संगठन है।
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को पहले भी कई बार पत्र भेजकर 11 प्रमुख मांगों के समाधान की मांग की थी। 30 जून, 01 दिसंबर तथा 16 जुलाई, 22 अगस्त और 29–31 दिसंबर 2025 को भी ज्ञापन सौंपे गए थे, लेकिन मांगों पर त्वरित कार्यवाही नहीं होने का आरोप संगठन ने लगाया है।
फेडरेशन की प्रमुख 11 मांगें
जुलाई 2016 से लंबित DA एरियर को कर्मचारियों के GPF में समायोजित किया जाए।
चार स्तरीय पदोन्नत समयमान 8, 16, 24 और 32 वर्ष में प्रदान किया जाए।
अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिन किया जाए (मध्यप्रदेश की तर्ज पर)।
विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों पर पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ प्रदान किए जाएँ।
सहायक शिक्षक एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान दिया जाए।
अनुकंपा नियुक्ति को निःशर्त लागू कर 10% सीलिंग समाप्त की जाए।
पंचायत सचिवों का शासकीयकरण और नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन व पदोन्नति दी जाए।
सभी विभागों में समानता के साथ सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
कार्यभारित, दैनिक वेतनभोगी, अनियमित व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
आधार-आधारित उपस्थिति और सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति बंद की जाए तथा रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की अनुमति दी जाए।
फेडरेशन का बयान
फेडरेशन का कहना है कि “मोदी की गारंटी” के अनुरूप कर्मचारियों की मांगों पर अब तक सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराज़गी है।
आज प्रस्तावित प्रदर्शन के माध्यम से सभी जिला और विकासखंड स्तर के पदाधिकारी मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से मांगों के शीघ्र समाधान की अपील करेंगे।





