एक ही व्यक्ति दो जगह नौकरी करते पकड़ा गया!जिला अस्पताल मुंगेली में जांच के आदेश, बैंक मैनेजर की भूमिका भी संदिग्ध

जिला चिकित्सालय मुंगेली (छत्तीसगढ़) में एक ही व्यक्ति द्वारा दो अलग-अलग संस्थानों में नौकरी करने का मामला गंभीर स्वरूप ले चुका है। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के लिए आदेश जारी कर तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
क्या है मामला?
शिकायत के अनुसार विकास कुमार महिलांग, ओ.टी. अटेंडर (जीविस), जिला अस्पताल में कार्यरत रहते हुए सेंटरल बैंक ऑफ इंडिया, मुंगेली शाखा में भी कार्य कर रहे थे। यह दोहरी सेवा सरकारी सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
शिकायत में यह भी आरोप है कि
विकास महिलांग ने अपने भाई सुरेश महिलांग को अपने दस्तावेजों का उपयोग कर बैंक में नौकरी दिलाई।
बैंक जैसे संवेदनशील संस्थान में सुरक्षा व गोपनीयता के बीच किसी अन्य व्यक्ति को अनधिकृत रूप से काम करवाया जाना गंभीर गड़बड़ी मानी जा रही है।
बैंक मैनेजर की भूमिका पर भी सवाल
सूत्रों के अनुसार शाखा प्रबंधक द्वारा ही सुरेश महिलांग को नियुक्त किया गया, और उससे सभी बैंकिंग कार्य करवाए जाते रहे। इस कारण बैंक मैनेजर की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
सूत्रों व शिकायतकर्ताओं ने मांग रखी है कि
विकास महिलांग, सुरेश महिलांग और बैंक मैनेजर पर धारा 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए।
विकास महिलांग को जो भी वेतन भुगतान हुआ है, उसकी रिकवरी की जाए, ताकि भविष्य में ऐसा फर्जीवाड़ा न हो सके।


जांच समिति गठित
सिविल सर्जन ने इस संवेदनशील मामले पर तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति में—
डॉ. के.एस. कंवर, पैथोलॉजी विशेषज्ञ
डॉ. शिवनाथ सिंह सिदार, नेत्र विशेषज्ञ
डॉ. संदीप कुमार पाटिल, आर.एम.ओ.
को शामिल किया गया है।
समिति को निर्देश हैं कि 02 दिवस के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
जांच के लिए उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रोस्टर, बैंक स्टेटमेंट सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।
उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई सूचना
प्रकरण की जानकारी निम्न अधिकारियों को भी भेजी गई है—
अध्यक्ष, जीवनदीप समिति
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, मुंगेली
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मुंगेली
साथ ही संबंधित कर्मचारी विकास कुमार महिलांग को जांच में सहयोग करने और आवश्यक दस्तावेज सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन इस मामले को अनुशासन और पारदर्शिता के गंभीर उल्लंघन के रूप में देख रहा है।





