गुप्त नवरात्र शक्ति संचय का पर्व : हिमांशु महाराज…

लोरमी 19 जनवरी 2026
शक्ति उपासना का विशेष पर्व गुप्त नवरात्र साधकों के लिए ऊर्जा संचय और आध्यात्मिक जागरण का अवसर माना जाता है। विदित हो कि वर्षभर में कुल चार नवरात्र आते हैं—चैत्र और आश्विन शुक्ल पक्ष के प्रकट नवरात्र, तथा आषाढ़ और माघ शुक्ल पक्ष के गुप्त नवरात्र, जिनकी साधना भारतीय परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।
शिक्षाविद, साहित्यकार, कथावाचक तथा राज्यपाल सम्मानित डॉ. सत्यनारायण तिवारी ने हनुमतपीठाधीश्वर जगद्गुरु महावीर दास जी से भेंट के उपरांत ठाकुर संतोष सिंह के निवास में आयोजित प्रवचन में कहा कि नवरात्र शक्ति संचय का उत्सव है। इन दिनों में देवी यशगान, जगराता, उपवास, दुर्गा सप्तशती पाठ और देवीभागवत कथा का विशेष आयोजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख सिद्ध शक्तिपीठों—
महामाया मंदिर (लोरमी), डोंगरीगढ़ भुवनेश्वरी मंदिर, बाबाडोंगरी कल्याणी मंदिर, त्रिशूला मंदिर, रतनपुर महामाया, डोंगरगढ़ बम्लेश्वरी, बस्तर दन्तेश्वरी, कोरबा सर्वमंगला, मल्हार डिडनेश्वरी, गनियारी रणजीत, करगीरोड कोटा चण्डी, गौरकापा दुर्गा, पंडरिया महामाया तथा सारधा अष्टभुजी दुर्गा मंदिर—में चारों नवरात्र परंपरागत रूप से कुमारी पूजन, हवन और विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
डॉ. तिवारी ने कहा कि प्रतिपदा से नवमी तक क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की उपासना से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।



