
जांजगीर से बिलासपुर तक मानवता की मिसाल, सिम्स मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को सौंपा गया पार्थिव शरीर

बिलासपुर/जांजगीर। मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने की सोच हर किसी के मन में नहीं होती। जांजगीर निवासी स्वर्गीय श्री मोतीलाल डहरिया ने अपने देहदान के माध्यम से मानवता, चिकित्सा शिक्षा और समाजसेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए सहमति से पार्थिव शरीर का देहदान किया।
जानकारी के अनुसार, स्व. मोतीलाल डहरिया के परिजनों ने इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा रायपुर से संपर्क कर देहदान की इच्छा व्यक्त की। चूंकि स्व. डहरिया जांजगीर निवासी थे, इसलिए उनका देहदान बिलासपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में किया जाना था।
रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्य श्री सिन्हा ने इस संबंध में प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन से संपर्क कर देहदान की प्रक्रिया और आवश्यक कागजी कार्रवाई में सहयोग का आग्रह किया। संस्था ने तत्काल सहमति देते हुए परिवार को आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
परिजनों ने पूरी की अंतिम इच्छा
स्व. मोतीलाल डहरिया की अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के काम आए। उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या डहरिया और पुत्र गुहा राम डहरिया सहित परिजनों ने आपसी सहमति से उनका पार्थिव शरीर सिम्स मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर के एनाटॉमी विभाग को देहदान किया।
प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन के सदस्य सत्या चंद्राकर के सहयोग से आवश्यक कानूनी एवं औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया।
देहदान केवल शरीर का दान नहीं, ज्ञान का दान
स्व. मोतीलाल डहरिया का यह निर्णय केवल देहदान तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अमूल्य योगदान है। उनकी देह चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन में उपयोगी होगी और भविष्य में बेहतर चिकित्सा सेवाओं के निर्माण में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देगी।
परिजनों ने कहा कि परिवार के प्रिय सदस्य को खोने का दुख हमेशा रहेगा, लेकिन इस बात का संतोष है कि उनकी अंतिम इच्छा पूरी हुई और उनकी देह अब चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा के काम आएगी।
परिजनों ने इस पूरी प्रक्रिया में तत्परता से सहयोग देने के लिए प्रयास अ स्माल स्टेप फाउंडेशन तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ संस्थाओं ने सहयोग किया, उसके लिए परिवार हमेशा आभारी रहेगा।
स्व. मोतीलाल डहरिया का देहदान समाज को यह संदेश देता है कि इंसान की अंतिम सांस के बाद भी उसकी सेवा और सोच समाज के लिए उपयोगी हो सकती है। उनका यह कदम निश्चित रूप से अन्य लोगों और परिवारों को भी देहदान एवं अंगदान के प्रति जागरूक और प्रेरित करेगा।





